Saturday, March 4, 2017

स्वायत्तता का दुरूपयोग !




भारत में स्वायत्त संस्थाओ को अगर किसी से खतरा है तो वह है उनकी अपनी जनविरोधी और राष्ट्रविरोधी नीतियां !
क्या स्वायत्त संस्थाओ को नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती कि वे अपना काम ईमानदारी से देशहित में करे !
स्वायत्त संस्थाओ को भ्रस्टाचार और बेईमानी का अधिकार किसने दिया ??
स्वायत्त संस्थाए यह क्यों भूल जाती हैं कि उनका उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ जनहित व् राष्ट्रहित है भ्रस्टाचार और लूट -खसोट नहीं !
आज स्वायत्त संस्थाओ में सबसे बड़ी समस्या है भ्रस्टाचार और दलाली ! जिनके चंगुल में इस देश कि सभी स्वायत्त संस्थाए फंस चुकी है !
अगर स्वायत्त संस्थाए अपनी जिम्मेदारियों को भूलकर स्वाहित में काम करेगी तो उन पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है !
मीडिया इस देश में स्वायत्त है ! क्या मिडिया अपनी जिम्मेदारी पूर्ण ईमानदारी से निर्वहन कर रही है ??
विश्वविद्यालयों कि क्या स्थिति है आज सबको पता है जहां पैसो में डिग्रियां खुलेआम बिक रही है ??
इसी तरह आर बी आई हो या फिर न्यायपालिका ! अगर ये सभी संस्थाए पूर्ण ईमानदारी से अपनी -अपनी जिम्मेदारियों को निष्पक्षता पूर्वक निर्वहन करे तो उन पर कोई प्रश्नचिन्ह खड़ा नही कर सकता !
लेकिन सवायत्त कि ओट में सबकुछ जायज नहीं हो सकता ! यह बात स्वायत्त संस्थाओ और उनके पदाधिकारियों को अच्छी तरह समझना होगा !
मांफ करना प्रश्न तभी उठते हैं जब कमियां होती है ??

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