उन्हें दलित क्यों कहा जाता हैं ??
उन्हें दलित कहकर राजनितिक पार्टियों के लोग क्या उनका अपमान नहीं करती ??
वो दलित नहीं वो हिन्दू हैं ! वे भी आयों कि ही संताने हैं ! हाँ वो गरीब अवश्य हैं पर ईमानदार गरीब हैं और शायद अपनी इसी ईमानदारी के खातिर वो आज भी गरीब हैं ! हम सभी राजनितिक महानुभावो से नम्र निवेदन करतें है कि कृपया उनकी गरीबी के कारण उन्हें दलित कहकर शर्मिंदा न करे ! वो ईमानदार और मेहनतकश हिन्दू हैं ! उन्हें कदम कदम पर उपेक्षित न किया जाए ! वे गरीब हिन्दुस्तानी है पर उनकी गरीबी के लिए सभी राजनितिक लोग ही जिम्मेदार हैं !
वो मेहनतकश हैं और ईमानदारी से मेहनत करतें हैं ! वे पत्थर अवश्य तोड़ते हैं पर उन्ही के द्वारा थोड़े गए पत्थरो से सुन्दर इमारतें और देश की प्रगति के लिए सड़के तैयार होती है ! वे देश की प्रगतिशीलता के प्रतिमूर्ति हैं !
वे लुटेरे नहीं हैं उन लोगो की तरह जिन्होंने देश लूटने के खातिर अपनी आत्मा तक कौड़ियों के भाव बेंच दी है ! उनकी आत्मा आज भी स्वच्छ और निर्दोष है क्युकी उन्होंने किसी का कत्लेआम नहीं किया है ! किसी के हिस्से की रोटी नहीं खाई है ! ये राजनितिक लोग जो खुद को दलितों का मसीहा कहते फिर रहे है पहले अपने गिरेबान में झांककर तो देखे ! दलितों के नाम पर योजनाये लाते हैं और अपने लाव लस्कर के साथ मिलकर खुद ही गटक जाते हैं ! वो गरीब बेचारे गरीब अवश्य है पर इनकी तरह गद्दार नहीं है !
क्या वे हिन्दू नहीं है ! आखिर वे भी तो हिंदुत्व की पहचान हैं ??
बांटो और राज करो की रणनीति पर ये नेतागण हमेशा से काम करतें है और काफी हद से वे सफल भी होते हैं पर अब उनकी दाल नहीं गलने वाली ! हम मानतें है कि हिन्दू समाज में भी कुछ कमियां रही हैं पर छोटी मोदी बातो का बतंगड़ बनाकर हिन्दुओं को विभाजित नहीं किया जा सकता ! यह बात हिन्दू समाज को भली भांति समझना चाहिए कि कुछ राजनितिक लोग हैं जो हिन्दुओं को बांटकर अपनी राजनितिक रोटियां सेकना चाहते हैं !
उन्हें दलित कहकर हिन्दू समाज से अलग करने की साजिस रची जा रही हैं ताकि वो खुद हिन्दू समाज से अलग समझें और हिन्दू समाज में असुरक्षित महसूस करे !
उन्हें दलित कहकर राजनितिक पार्टियों के लोग क्या उनका अपमान नहीं करती ??
वो दलित नहीं वो हिन्दू हैं ! वे भी आयों कि ही संताने हैं ! हाँ वो गरीब अवश्य हैं पर ईमानदार गरीब हैं और शायद अपनी इसी ईमानदारी के खातिर वो आज भी गरीब हैं ! हम सभी राजनितिक महानुभावो से नम्र निवेदन करतें है कि कृपया उनकी गरीबी के कारण उन्हें दलित कहकर शर्मिंदा न करे ! वो ईमानदार और मेहनतकश हिन्दू हैं ! उन्हें कदम कदम पर उपेक्षित न किया जाए ! वे गरीब हिन्दुस्तानी है पर उनकी गरीबी के लिए सभी राजनितिक लोग ही जिम्मेदार हैं !
वो मेहनतकश हैं और ईमानदारी से मेहनत करतें हैं ! वे पत्थर अवश्य तोड़ते हैं पर उन्ही के द्वारा थोड़े गए पत्थरो से सुन्दर इमारतें और देश की प्रगति के लिए सड़के तैयार होती है ! वे देश की प्रगतिशीलता के प्रतिमूर्ति हैं !
वे लुटेरे नहीं हैं उन लोगो की तरह जिन्होंने देश लूटने के खातिर अपनी आत्मा तक कौड़ियों के भाव बेंच दी है ! उनकी आत्मा आज भी स्वच्छ और निर्दोष है क्युकी उन्होंने किसी का कत्लेआम नहीं किया है ! किसी के हिस्से की रोटी नहीं खाई है ! ये राजनितिक लोग जो खुद को दलितों का मसीहा कहते फिर रहे है पहले अपने गिरेबान में झांककर तो देखे ! दलितों के नाम पर योजनाये लाते हैं और अपने लाव लस्कर के साथ मिलकर खुद ही गटक जाते हैं ! वो गरीब बेचारे गरीब अवश्य है पर इनकी तरह गद्दार नहीं है !
क्या वे हिन्दू नहीं है ! आखिर वे भी तो हिंदुत्व की पहचान हैं ??
बांटो और राज करो की रणनीति पर ये नेतागण हमेशा से काम करतें है और काफी हद से वे सफल भी होते हैं पर अब उनकी दाल नहीं गलने वाली ! हम मानतें है कि हिन्दू समाज में भी कुछ कमियां रही हैं पर छोटी मोदी बातो का बतंगड़ बनाकर हिन्दुओं को विभाजित नहीं किया जा सकता ! यह बात हिन्दू समाज को भली भांति समझना चाहिए कि कुछ राजनितिक लोग हैं जो हिन्दुओं को बांटकर अपनी राजनितिक रोटियां सेकना चाहते हैं !
उन्हें दलित कहकर हिन्दू समाज से अलग करने की साजिस रची जा रही हैं ताकि वो खुद हिन्दू समाज से अलग समझें और हिन्दू समाज में असुरक्षित महसूस करे !
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hi freinds come with me.