Saturday, March 4, 2017

कौन बचाएगा उन बदनसीबों का बचपन इस बेरहम गरीबी से

सवाल यह कि कौन बचाएगा उन बदनसीबों का बचपन इस बेरहम गरीबी से ??
उन्हें जीवन मिला है तो उनका भी हक़ है वो भी जियें !
उन्हें बचपन मिला है तो उनका भी हक़ है वो भी दुग्ध पियें !
एक तरफ तो वे लोग हैं जो अपने बच्चों के साथ रंगरेलियां मनाने शॉपिंग माल में जाते हैं सिर्फ एक दिन में ही हजारों रूपये पानी की तरह बहा के चले आते हैं ! और दूसरी तरफ वे लोग हैं जिन्हे खाने के लिए शाम को एक सूखी रोटी वो भी सिर्फ नमक के साथ नसीब नहीं हो रही है जिनके बच्चे घास फुस की रोटियां खाकर अपना बचपन काट रहे हैं ! यह उस आधुनिक भारत की सच्ची तस्वीर है जिसके नागरिकों आज भी सूखी रोटियां भी नसीब में नहीं हैं ! जिसे आज विश्व का सबसे तेज गति से विकास करने का अहंकार हो गया है !
हम बात कर रहे है बुंदेलखंड के उन बदनसीब बच्चो के बारे में जिनके नसीब में घास फुस की रोटियों के अलावा और कुछ भी नहीं है ! कपड़ों के नाम पर उनके शरीर पर वही फटे -पुराने चीथड़े ! जिन्हे देखकर कुलीन वर्ग के बच्चे अपने बाप को हजार गालियां सुना दे ! जहाँ एक ओर धनी वर्ग के बच्चे अपने शौक पूरा करने के लिए खर्च कर देतें है वही दूसरी तरफ उससे आधे रुपयों में पुरे परिवार का साल भर का खर्च भी नहीं मिल पा रहा है !  एक रिपोर्ट के अनुसार इन बच्चों में ६०% से अधिक बच्चो को दुग्ध नसीब ही नहीं हुआ ! ये बच्चे जिन्हे भारत के भविष्य कहा जाता हैं और जिनके बलबूते यह देश विश्व में नम्बर -१ बनने का सपना देख रहा हैं ! एक तरफ तो हम विकसित भारत का सपना बुनने में लगें हैं और दूसरी तरफ इस गिरी हुई मानसिकता में समाज विकसित कर रहे हो ! 
इंसानियत के नाम पर इस देश में लाखो सवयंसेवी संस्थाएं हैं और कागजों में तो उनके बड़े महान कारनामे है ये सच है कहने के लिए इस देश में २४ (चौबीस ) लाख से अधिक स्वयं सेवी संस्थाएं है ! किन्तु हकीकत में आधे से अधिक संस्थाएं सिर्फ अपने स्वार्थी भविष्य के निर्माण में कार्यरत हैं ! हाँ बहुत साड़ी संस्थाए और उनमें काम करने वाले लोग भी बेशक अच्छे और ईमानदार हैं पर बहुत बढ़ी संख्यां में वे संस्थाएं भी है जो अपना काम ईमानदारी से नहीं कर रही है वर्ना सिर्फ स्वयंसेवी संस्थाओं से ही देश महान बन चूका होता भूख से मरने की तो नौबत कभी नहीं आती !  
तुह्मारी जी डी पि ग्रोथ ७% हो या ७०% उन मासूमों के पापी पेट से क्या लेना देना जिनके नसीब में रोटी का टुकड़ा भी नसीब में नहीं है !  रही बात राजनीति की और नौकरशाहों के भ्रस्टाचार की तो इनसे इस देश को अब भगवान ही बचाएगा और कोई दूसरा रास्ता तो हमें दिखाई ही नहीं दे रहा है ! सवाल यह कि कौन बचाएगा उन बदनसीबों का बचपन इस बेरहम गरीबी से ??

उन्हें दलित क्यों कहा जाता हैं ??

उन्हें दलित क्यों कहा जाता हैं ??
उन्हें दलित कहकर राजनितिक पार्टियों के लोग क्या उनका अपमान नहीं करती ??
वो दलित नहीं वो हिन्दू हैं ! वे भी आयों कि ही संताने हैं ! हाँ वो गरीब अवश्य हैं पर ईमानदार गरीब हैं और शायद अपनी इसी ईमानदारी के खातिर वो आज भी गरीब हैं ! हम सभी राजनितिक महानुभावो से नम्र निवेदन करतें है कि कृपया उनकी गरीबी के कारण उन्हें दलित कहकर शर्मिंदा न करे ! वो ईमानदार और मेहनतकश हिन्दू हैं ! उन्हें कदम कदम पर उपेक्षित न किया जाए ! वे गरीब हिन्दुस्तानी है पर उनकी गरीबी के लिए सभी राजनितिक लोग ही जिम्मेदार हैं !
वो मेहनतकश हैं और ईमानदारी से मेहनत करतें हैं ! वे पत्थर अवश्य तोड़ते हैं पर उन्ही के द्वारा थोड़े गए पत्थरो से सुन्दर इमारतें और देश की प्रगति के लिए सड़के तैयार होती है ! वे देश की प्रगतिशीलता के प्रतिमूर्ति हैं !
वे लुटेरे नहीं हैं उन लोगो की तरह जिन्होंने देश लूटने के खातिर अपनी आत्मा तक कौड़ियों के भाव बेंच दी है ! उनकी आत्मा आज भी स्वच्छ और निर्दोष है क्युकी उन्होंने किसी का कत्लेआम नहीं किया है ! किसी के हिस्से की रोटी नहीं खाई है ! ये राजनितिक लोग जो खुद को दलितों का मसीहा कहते फिर रहे है पहले अपने गिरेबान में झांककर तो देखे ! दलितों के नाम पर योजनाये लाते हैं और अपने लाव लस्कर के साथ मिलकर खुद ही गटक जाते हैं ! वो गरीब बेचारे गरीब अवश्य है पर इनकी तरह गद्दार नहीं है !
क्या वे हिन्दू नहीं है ! आखिर वे भी तो हिंदुत्व की पहचान हैं ??
बांटो और राज करो की रणनीति पर ये नेतागण हमेशा से काम करतें है और काफी हद से वे सफल भी होते हैं पर अब उनकी दाल नहीं गलने वाली ! हम मानतें है कि हिन्दू समाज में भी कुछ कमियां रही हैं पर छोटी मोदी बातो का बतंगड़ बनाकर हिन्दुओं को विभाजित नहीं किया जा सकता ! यह बात हिन्दू समाज को भली भांति समझना चाहिए कि कुछ राजनितिक लोग हैं जो हिन्दुओं को बांटकर अपनी राजनितिक रोटियां सेकना चाहते हैं ! 
उन्हें दलित कहकर हिन्दू समाज से अलग करने की साजिस रची जा रही हैं ताकि वो खुद हिन्दू समाज से अलग समझें और हिन्दू समाज में असुरक्षित महसूस करे ! 

अभिव्यक्ति कि आजादी कि कोई सीमारेखा भी होनी चाहिए या नहीं ?

बड़ा सवाल यह कि अभिव्यक्ति कि आजादी कि कोई सीमारेखा भी होनी चाहिए या नहीं ??
भारत में अभिव्यक्ति की आजादी पर समय समय पर सवाल उठते रहें हैं पर इस बार एक फिल्म निर्माता ने अभिव्यक्ति की आजादी पर सवाल खड़ा किया है उन महानुभाव के अनुसार भारत में अभिव्यक्ति कि आजादी सबसे बड़ा मजाक है ! हम भी मानते हैं कि अभिव्यक्ति कि आजादी के साथ मजाक अवश्य हो रहा है पर यह मजाक कौन कर रहा है ?? मजाक तो उन जैसे कुसंस्कारी और फूहड़पन संस्कारो वाले लोगो ने देश कि सुसंस्कारितायुक्त संस्कृति और नैतिकतावादी सभ्यता के साथ किया है जिसका विरोध उन्हें अभिव्यक्ति कि आजादी पर प्रतिबन्ध लगता है !अभिव्यकी की आजादी का मतलब फुहड़तापन और नंगापन की संस्कृति को बढ़ावा देना नहीं है जिसकी तरफ श्रीमान कारन जौहर इशारा कर रहे थे !
हो सकता है उनको ऐसा लग रहा हो यह उनका अपना मत है  पर सवाल यह कि यदि अभिव्यक्ति कि आजादी सिर्फ एक मजाक है तो ऐसा मजाक उन्होंने भरी महफ़िल में किया है क्या इसके लिए उनके ऊपर कोई जुर्माना अथवा कोई पाबंदी लगी ! यदि नहीं तो उन पर लगनी चाहिए क्युकी जिस अभिव्यक्ति कि आजादी के खिलाफ उन्होंने बोला है वह भी तो अभिव्यक्ति कि आजादी ही है अन्यथा वो बोलने कि हिम्मत ही नहीं करते ! इससे साबित होता है कि अभी भी अभिव्यक्ति कि पूर्ण आजादी है !
उससे बड़ा सवाल यह कि अभिव्यक्ति कि आजादी कि कोई सीमारेखा भी होनी चाहिए या नहीं ??
इस पर मेरा मत यही है कि अभिव्यक्ति कि आजादी की सीमारेखा सुनिश्चित होनी चाहिए ! क्युकि
अभिव्यकी की आजादी का मतलब फुहड़तापन और नंगापन की संस्कृति को बढ़ावा देना नहीं है जिसकी तरफ श्रीमान कारन जौहर इशारा कर रहे थे ! अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब संस्कारितायुक्त संस्कृति को बढ़ावा देना है न कि कुसंस्कारों  से युक्त संस्कृति जिसका मतलब है खुलकर जीना न कि खोलकर जीना ! ऐसे लोग किस प्रकार के समाज और किस प्रकार कि संस्कृति के प्रणेता है यह सबको पता है जहाँ रिश्तों के नाम पर सबकुछ जायज है ! सम्बन्धो में नाम पर अश्लीलता और नग्नता जिनका पेशा है ! 
अगर समाज में उन्हें (कारन जौहर जैसे महानुभावों को )अभिव्यक्ति कि आजादी के नाम पर अश्लीलता और नग्नता पेश करने कि अनुमति दी जाती है तो अभिव्यक्ति कि आजादी है अन्यथा नहीं है ! जिस देश में लोग खुलेआम मिडियाँ के सामने प्रधानमन्त्री को अपशब्द तक बोलते है यदि उस देश में भी अभिव्यक्ति कि आजादी नहीं है तो किस देश में है हमें तो याद नहीं आ रहा है यदि आप को पता हो तो हमें भी अवश्य बताइयेगा ??

भ्रस्टाचार के भरोसे विश्व महाशक्ति बनने की आकांक्षा !

भ्रस्टाचार के भरोसे विश्व महाशक्ति बनने की आकांक्षा !
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भारत ! शायद दुनियां का पहला ऐसा देश है जिसका सरकारी सिस्टम भ्रस्टाचार के गर्त में धंस चुका है !
सरकार का ही सिस्टम सरकारी योजनाओ का पलीता लगा देता है ! इस देश की ९९% सरकारी योजनाए भ्रस्टाचार की शिकार होकर फेल हो जाती है !
निश्चय ही भारत का भविष्य अन्धकार में है ! इस देश के चोरतंत्र में साबित कर दिया कि यह देश (भारत ) विकसित होने का ख्वाब न संजोये !
विकसित भारत का सपना चोरतंत्र के सहारे कभी पूरा नहीं होने वाला !
प्रधानमन्त्री मोदी जी पहले आप सरकारी चोरतंत्र को ठीक करो फिर गरीबी मुक्त भारत और विकसित भारत के सपना देखो !
भारत भविष्य में कभी भी चीन और अमेरिका का मुकाबला नही कर सकता ! जब तक इस देश में सरकारी चोरतंत्र विद्यमान रहेगा तब तक भारत का भविष्य अंधरे में ही रहेगा !
जब तक भारत सरकार अपने चोरतंत्र को ठीक नहीं करती तब तक विश्व महाशक्ति बनने के सपने देखना बंद कर देना चाहिए ! यही सच्चाई है !

स्वायत्तता का दुरूपयोग !




भारत में स्वायत्त संस्थाओ को अगर किसी से खतरा है तो वह है उनकी अपनी जनविरोधी और राष्ट्रविरोधी नीतियां !
क्या स्वायत्त संस्थाओ को नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती कि वे अपना काम ईमानदारी से देशहित में करे !
स्वायत्त संस्थाओ को भ्रस्टाचार और बेईमानी का अधिकार किसने दिया ??
स्वायत्त संस्थाए यह क्यों भूल जाती हैं कि उनका उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ जनहित व् राष्ट्रहित है भ्रस्टाचार और लूट -खसोट नहीं !
आज स्वायत्त संस्थाओ में सबसे बड़ी समस्या है भ्रस्टाचार और दलाली ! जिनके चंगुल में इस देश कि सभी स्वायत्त संस्थाए फंस चुकी है !
अगर स्वायत्त संस्थाए अपनी जिम्मेदारियों को भूलकर स्वाहित में काम करेगी तो उन पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है !
मीडिया इस देश में स्वायत्त है ! क्या मिडिया अपनी जिम्मेदारी पूर्ण ईमानदारी से निर्वहन कर रही है ??
विश्वविद्यालयों कि क्या स्थिति है आज सबको पता है जहां पैसो में डिग्रियां खुलेआम बिक रही है ??
इसी तरह आर बी आई हो या फिर न्यायपालिका ! अगर ये सभी संस्थाए पूर्ण ईमानदारी से अपनी -अपनी जिम्मेदारियों को निष्पक्षता पूर्वक निर्वहन करे तो उन पर कोई प्रश्नचिन्ह खड़ा नही कर सकता !
लेकिन सवायत्त कि ओट में सबकुछ जायज नहीं हो सकता ! यह बात स्वायत्त संस्थाओ और उनके पदाधिकारियों को अच्छी तरह समझना होगा !
मांफ करना प्रश्न तभी उठते हैं जब कमियां होती है ??

लोकतंत्र के चुनाव में मानवीय लोकतंत्र कही खो गया है !

लोकतंत्र के चुनाव में मानवीय लोकतंत्र कही खो गया है !
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समझ में नही आता कि आज के चुनाव मानवीय लोकतंत्र का है या फिर गधो के लोकतंत्र का !
समझ में नही आ रहा कि क्या इस देश में विकास के सारे पैमाने पुरे हो चुके है और लोगों कि गरीबी -बेकारी ख़त्म हो चुकी है या फिर उसे ख़त्म करने कि जरुरत नही है !
क्या आप बता सकते हैं कि इस देश में बेरोजगारी ख़त्म हो चुकी है या फिर अभी बाकी है क्योंकि लोकतंत्र के चुनावो में उसका कोई जिक्र तक नही है !
क्या आप बता सकते हैं कि भ्रस्टाचार इस देश कि अहम् समस्या है या भ्रस्टाचार आज के लोकतंत्रीय व्यवस्थान में नैतिकता के पैमानों में शुमार हो चूका है !
किसी भी पार्टी अथवा नेता कि तरफ से गरीबी -बेकारी और भ्रस्टाचार मुद्दा नही है ! मानो इस देश के सारे मुद्दे
ख़त्म हो चुके है और हर भारतवासी , ऐसो -आराम और सुखमय जीवन जीने लगा हो !
सच कहूँ तो हमें शर्म आ रही है कि यह लोकतंत्र जो कभी मानवीय समस्याओ के समाधान के लिए बनाया गया था आज गधों के नुक्ताचीनी में लगा हुआ है और मानवीय समस्याओं से दूर होता जा रहा है !

देश की शिक्षा व्यवस्था और समाज का माहौल कौन बिगाड़ रहा है !


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भारत के विश्वविद्यालयों को राजनीति का अखाड़ा किसने बनाया !
हम विश्वविद्यालयों के मानहदो और शिक्षाधिकारियों से पूछना चाहते हैं !
क्या विश्वविद्यालयों में सिर्फ और सिर्फ राजनीति शाश्त्र के विद्यार्थी ही पढ़ने जाते हैं !
राष्ट्रविरोधी गतिविधियों और नाना प्रकार की रोज रोज की नौटंकियों से क्या विज्ञानं और प्रौद्योगिकी, अर्थशास्त्र या फिर गणित के छात्रों का नुक्सान नही होता !
अन्य दूसरे संकाय के विद्यार्थी गण, मात्र राजनीति शाश्त्र के नौटंकीवालो छात्रों और बेवकूफ नेताओ के कारण अपना भविष्य बर्बाद क्यों करे !
रोज -रोज की नौटंकीबाजी और विश्वविद्यालयों के बंद करने से अन्य सभी विद्यार्थियों की शिक्षण का जो नुक्सान होता है उसकी भरपाई कौन करेगा !
हम पूछना चाहते है क्या इस देश के विद्यालय और विश्वविद्यालय सिर्फ और सिर्फ राजनीति के लिए और राजनितिक अखाड़े के लिए बने है !
क्या सिर्फ राजनीति से ही देश का भविष्य उज्जवल होगा ! या फिर प्रौद्योगिकी शिक्षा और अनुसन्धान से देश का भविष्य उज्जवल होगा !
भारत सरकार से विनम्र अनुरोध है इस देश के विद्यार्थियों और इस देश के उज्जवल भविष्य के लिए राजनितिक शिक्षा और राजनितिक नौटंकियों के लिए अलग से विश्वविद्यालय बनाये जाए जिसमे सिर्फ और सिर्फ राजनीत की शिक्षा प्रदान किया जाए !